पंडित रामजी त्रिपाठी - कानपुर

परिचय एवं संघर्ष –
 
 

पंडित रामजी त्रिपाठी समाज कल्याण के कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। त्रिपाठी जी ने गाय,गंगा और गरीब को अपना मुख्य दायित्व मान कर समाजहित में कार्य किये हैं और निरंतर कर रहे हैं।

 

परिचय एवं संघर्ष – 

 

रामजी त्रिपाठी का जन्म 1953 में कानपुर देहात के ग्राम गौरी लक्खा के समृद्ध परिवार में हुआ। रामजी की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम के ही विद्यालय में हुई। कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के लिए ग्राम से बाहर जाकर पढ़ना पड़ा क्योंकि गांव में उचित शिक्षा की व्यवस्था नहीं थी। रामजी ने बीए, एलएलबी की पढ़ाई कानपुर नगर से पूर्ण की।

समाज सुधार के कार्य –

रामजी त्रिपाठी ने मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए कई आंदोलन किये हैं जिससे उन गरीबों को आर्थिक एवं मानसिक अशांति से मुक्ति मिल सके। यह स्वयं के लिए ही नहीं अपितु दूसरों की हक की लड़ाई भी हमेशा लड़ते रहे हैं। एक बार 3 माह तक रोडवेज विभाग में नौकरी के दौरान दीवाली के अवसर पर सरकार द्वारा बोनस भेजे जाने के बाद भी मजदूरों और कर्मचारियों को बोनस न दिए जाने पर रामजी ने मोर्चा खोल दिया और अपने अथक प्रयासों के बल पर अधिकारी से दस्तख़त कराने के बाद मजदूरों को उनका हक़ दिला कर ही माने।

 

परिचय एवं संघर्ष – 

 

मगर इस वजह से उन्हें इसके बाद भ्रष्ट अधिकारियों की धमकी के कारण और अपने परिवार की सुरक्षा के चलते अपने घर से दूर छिप कर भी रहना पड़ा। दिवाली के बाद त्रिपाठी जी तत्कालीन परिवहन मंत्री श्री शंकर पाण्डेय से मिले और वहाँ उन्होंने मंत्री जी को  इस भ्रष्टाचार से अवगत कराया।  इसके बाद त्रिपाठी जी को रोडवेज समिति का अध्यक्ष बना दिया गया। कुछ समय बाद त्रिपाठी जी को क्षेत्र का अध्यक्ष और फिर रोडवेज विभाग में ही प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया। 1984 में कर्मचारियों को उनका सीसीए न मिलने के कारण काफ़ी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था ऐसे में त्रिपाठी जी पीड़ित कर्मचारियों को इकट्ठा कर आंदोलन की तैयारी की।

 

परिचय एवं संघर्ष – 

 

1986 में इस विषय पर हड़ताल शुरू कर दी। चालीस हज़ार लोगों के साथ फूलबाग में एकत्रित होकर मुख्यमंत्री को झण्डारोहण करने से रोकने का ऐलान कर दिया। कानपुर कचहरी में सभाएं भी की जिससे नाराज़ होकर मंत्रियों ने त्रिपाठी जी को जेल भेजने की भी धमकी दी। उस समय मजदूरों के साथ मिलकर इन्होंने जेल भरो आंदोलन मुहीम को चलाया। इस आन्दोलन में 80 हज़ार कर्मचारियों ने रामजी का साथ दिया।

फतेहपुर, कानपुर जेल में रहने के बाद भी रामजी ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहे। इसके बाद रामजी त्रिपाठी से आईएएस एस डी बागला और हरप्रताप सिंह ने मुलाकात की जिसका परिणाम यह हुआ कि उस वक्त के मुख्यमंत्री ने 4% सीसीए देने की बात को मंजूरी दे दी।

इसके बाद आगे चलकर उन्होंने प्रदेश में 22 दिन तक हड़ताल भी कराई जो राज्य कर्मचारी के वेतन के मुकाबले केंद्र कर्मचारी की मांग के विषय पर थी। जिसके सफल होने के बाद नगर निगम वोटिंग में जीते और अध्यक्ष पद हासिल किया।

टेक्सटाइल यूनिट के प्रदेश अध्यक्ष पद पर होने के साथ ही त्रिपाठी जी ने बीआईसी, एनटीसी के लिए भी एकजुट होकर प्रयास किये। आय सुचारू रूप से नहीं मिलने पर उनका नगर निगम कर्मचारी से झगड़ा हो गया। जिसपर टेक्सटाइल कमिश्नर ने जेल भेजने का फैसला दे दिया। इस प्रकार 31 बार जेल जाने के बावजूद त्रिपाठी जी ने जरूरतमंद को हर सम्भव मदद दी।

रामजी त्रिपाठी के सामाजिक कार्यों का पता इससे भी चलता है कि उन्होंने अपने ग्राम के विकास हेतु वहां एक विद्यालय खुलवाया जिससे मेधावी बच्चों को पढ़ने में असुविधा का सामना न करना पड़े।

स्वच्छ गंगा हेतु प्रयास –

रामजी त्रिपाठी ने अपनी माता जी की बात सुनकर राजनीतिक कार्यों को छोड़कर समाज और प्रकृति हित में कार्य करने का फैसला किया। गंगा को दूषित और कुपोषित होने से बचाने के लिए वह निरन्तर प्रयास कर रहे हैं। 2003 में गंगा बचाओ आंदोलन में गंगा में टेनरियों का गन्दा पानी, सीवर की गन्दगी, पॉलीथिन आदि हानिकारक तत्वों से मुक्ति दिलाने का कार्य भी किया।

 

परिचय एवं संघर्ष – 

 

रामजी ने त्यौहार के वक्त गंगा रथ पर मूर्तियों का गंगा में नहीं बल्कि भूमि में विसर्जन का कार्य कराया। बिठूर के लक्ष्मण सेतु पर जलसे का आयोजन कराया जहाँ शंकराचार्य, दण्डी स्वामी जैसे संतों को बुलवा कर ज्ञान दायनी बातें बताने का अनुरोध किया।

गौ माता के लिए प्रयास –

‘गाय हमारी माता समान होती है’

ये वाक्य हमारे पुराणों में सारगर्भित तरीके से वर्णित है। इन्हीं बातों का सही ज्ञान एवं उस गाय के लिए बचाव कार्य करने हेतु रामजी त्रिपाठी ने अनेक प्रयास किये।

उन्होंने अपने गांव में गौशाला का निर्माण कर विकलांग गायों, त्रसित गायों के लिए बसेरे और भोजन का इंतजाम व्यवस्थित रूप से कराया है। रामजी का मानना है कि भारत के किसान जहां स्वयं फसल का सही दाम तक नहीं ले पा रहे हैं वे गायों का पालन पोषण कैसे करेंगे? ऐसे में सही व्यवस्था हेतु रामजी ने उन गायों के निवास एवं भोजन की जिम्मेदारी स्वयं ली हुई है।

समाज का सहयोग –

 

परिचय एवं संघर्ष – 

 

रामजी त्रिपाठी का मानना है कि अभी तक उन्होंने जो भी कार्य किये उसमें यदि समाज का सहयोग न होता तो वे कुछ नहीं कर पाते। उनके आंदोलनों में कर्मचारियों, मजदूरों ने भी आंदोलन सफल बनाने में सहयोग दिया। गरीबों के उत्थान हेतु कार्य करने के कारण गरीब रामजी को बहुत पसंद करते हैं। रामजी का कहना है कि उनके सामने कैसी भी परिस्थिति उत्पन्न हो जाये या कितनी भी मुश्किलें आये वह निरंतर इसी प्रकार समाजहित, लोककल्याण के कार्य करते रहेंगे।